स्वामीनाथन आयोग सिफारिश : किसानों के लिए क्यों है वरदान

स्वामीनाथन आयोग सिफारिश
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7 अगस्त 1925, कुम्भकोणम, तमिलनाडु में जन्मे एमएस स्वामीनाथन पौधों के जेनेटिक वैज्ञानिक हैं। स्वामीनाथन भारत की 'हरित क्रांति' में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका के लिए विख्यात हैं। उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकसित किए थे। 'हरित क्रांति' कार्यक्रम के तहत ज़्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज ग़रीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे।
क्यों बना था स्वामीनाथन आयोग ?

अन्न की आपूर्ति को भरोसेमंद बनाने और किसानों की आर्थिक हालत को बेहतर करने, इन दो मकसदों को लेकर 2004 में केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया। इस आयोग ने अपनी पांच रिपोर्टें सौंपी। अंतिम व पांचवीं रिपोर्ट 4 अक्तूबर, 2006 में सौंपी गयी। रिपोर्ट ‘तेज व ज्यादा समग्र आर्थिक विकास’ के 11वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य को लेकर बनी है।

अयोग की सिफारिशों में किसान आत्महत्या की समस्या के समाधान, राज्य स्तरीय किसान कमीशन बनाने, सेहत सुविधाएं बढ़ाने व वित्त-बीमा की स्थिति पुख्ता बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। एमएसपी औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश भी की गई है ताकि छोटे किसान भी मुकाबले में आएं।

क्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें
  • किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज सस्ते दामो पर दिए जाएं।
  • एमएसपी औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश भी की गई है
  • गांवों में किसानों के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाई जाए।
  • महिला किसानों के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड जारी हो।
  • सरप्लस और इस्तेमाल नही हो रही ज़मीन का बंटवारा किया जाए।
  • खेतिहर ज़मीन को गैर कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न दिया जाए।
  • कर्ज की व्यवस्था हर गरीब से गरीब किसान को को दी जाए।
  • फसल बीमा की सुविधा हर फ़सल के लिए दी जाए।
  • किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए
  • किसानों को  जाने वाला कर्ज़ चार फीसदी ब्याज दर पर दिया जाए।
  • एग्रीकल्चर रिस्क फंड का गठन किया जाए।
  • कर्ज़ की उगाही में नरमी यानी जब तक किसान कर्ज़ चुकाने की स्थिति में न आ जाए तब तक उससे कर्ज़ न वसूल जाए।
स्वामीनाथन आयोग की मुख्य संस्तुतियां क्या है?

राष्ट्रीय किसान आयोग की रिपोर्ट किसानो की दशा और बढ़ती हुई आत्महत्यायें जैसे गम्भीर मामलो पर आधारित है

1. किसानों की आत्महत्या रोकने हेतु:-

आयोग की सिफारिसों में आत्महत्या के समस्या के समाधान, राज्य किसान आयोग बनाने, सेहत सुविधायें बढ़ाने व वित्त बीमा की स्थिति सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। एम0एस0पी0 औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिस की गयी है। ताकि छोटे किसान भी मुकाबले में आयें यही ध्येय मुख्य है। किसानों की फसल के न्युनतम समर्थन मूल्य कुछेक नगदी फसलो तक न रहे, इस लक्ष्य से ग्रामीण ज्ञान केन्द्र व मार्केट दखल स्कीम भी लाॅच करने की सिफारिशें की गयी है।

2. भूमि सुधार (लैण्ड रिफार्मस) हेतु:-
  • अतिरिक्त भूमि (सरपिलस लैण्ड) की सीलिंग और बटवारें की सिफारिश की गयी थी।
  • खेतिहर जमीनो (प्राइम एग्रीकल्चर लैण्ड) एवं जंगली भूमि को गैर कृषि इस्तेमाल हेतु कोरपोरेट सेक्टर को परिवर्तित न करने की सिफारिश की गयी थी।
  • आदिवासियो एवं चरवाहो को जंगल की जमीन दे दी जायें जिससे वह अपनी जीविका चला सके तथा इन्हे जगल में जानवरो को चराने का हक देने की सिफारिश है।
  • राष्ट्रीय भूमि उपयोग सलाह सेवा  की स्थापना की जायें जिसमें भू उपयोग एवं भूमि जोड़ने का निर्णय लेने की क्षमता हो तथा इसका काम परिस्थितिकी, मौसम और बाजार को देखना होता है।
  • कृषि भूमि को खरीदने बेचने की एक मैकानिज्म बनायी जाये जो क्वान्टम आफ लैण्ड उपयोग की प्रकृति एवं खरीदने वाले की कैटेगरी के आधार पर रेगुलेट किया जायें।
  • सिचाई सुधार हेतुः- सभी को पानी की सही मात्रा मिले के लिए आयोग ने निम्न सिफारिशें की है।
  • सिचाई के पानी की उपलब्धता सभी के पास होनी चाहिए। पानी के स्तर को सुधारने पर जोर देने के साथ ही श्कुआॅ, शोध, कार्य क्रमश् शुरू करने की बात कही गयी थी।
  • वर्षा जल संचयन द्वारा सिचाई जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा जलवाही स्तर के पुनर्भरण अनिवार्य होना चाहिए।
  • श्वर्षा जल संचयन एक तकनीक है जिसका प्रयोग भविष्य इस्तेमाल करने के उद्देश्य से (जैसे कृषि, शौंच, पशुओ को पीने आदि) के लिए अलग संसाधनो के विभिन्न माध्यमो के इस्तेमाल के द्वारा बारिस के पानी को बचाकर रखने तथा इकठ्ठा करने की एक प्रक्रिया बारिस के पानी को कृत्रिम टैंको, तालाबो में एकत्रित किया जा सकता है।
  • विशाल सतही जल प्रणाली एवं सूक्ष्म सिचाई हेतु सिचाई के क्षेत्र में ठोस लागत बढ़ाने तथा ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज हेतु एक नीति बनाने की सिफारिश की गयी ।

4. कृषि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु:-

भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही खेती के लिए ढाॅचागत विकास सम्बन्धी भी रिपोर्ट चर्चा में है। मिट्टी की जांच व सरंक्षण भी रिपोर्ट में है। इसके लिए मिट्टी के पोषण से जुड़ी कमियों को सुधारा जायें व मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओ का बढ़ा नेटवर्क तैयार करना होगा। और सड़क के जरीये जुड़ने के लिए सार्वजनिक निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जाये। आयोग का कहना है कि कृषि सुधार के लिए एक समग्र प्रयत्न की जरूरत है। इसमें लोगो की भूमिका बढ़ाना होगा।

5. ऋण और फसली बीमा हेतु:-

रिपोर्ट में बैकिंग व आसान वित्तीय सुविधाओं को आम किसान तक पहुचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सस्ती दरों पर फसल बीमा अर्थात ब्याज पर सीधे 4 प्रतिशत कम कर दी जायें। कर्ज उगाही में नरमी अर्थात जब तक किसान कर्ज चुकाने की स्थिति में न आ जायें। तबतक उससे कर्ज न वसूला जाये।

6. खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी) हेतु:

ग्रामीण एवं शहरी दोनो क्षेत्रो में प्रति व्यक्ति खाद्य अनाज की उपलब्धता में कमी एवं उसका आसमान वितरण एक ज्वलन्त समस्या है यानि प्रति व्यक्ति भोजन उपलब्धता बढ़े इस मकसद से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुधारो पर विशेष बल दिया।
  • वैश्विक सार्वजनिक वितरण प्रणाली बनाई जायें इसके लिए जी0डी0पी0 (सकल घेरलू उत्पाद) के 1 प्रतिशत की जरूरत होगी।
  • पंचायत एवं स्थानीय निकायो के संयोग से पोषक सर्मथन जीवन चक्र के आधार पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यवस्थित करने पर जोर दिया ।
  • दुकान अनाज एवं हर जगह पानीश् के सिद्धान्त के आधार पर महिला एवं स्वंयसेवी समूह की मदद से सामुदायिक भोजन एवं पानी बैंक स्थापित किये जाये। जिससे ज्यादा लोगो को खाना मिल सके। कुपोषण को दूर करने के लिए इसके अन्तर्गत प्रयास किये गये है। तथा कार्यक्रम एवं सेवायोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत खाद्य एवं भोजन के उपयोगी सुविधायें जारी रखी जाये।
  • लघु एंव सीमान्त किसानो की मदद से खेत उद्यमो की उत्पादकता, गुणवत्ता एवं आमदनी बढाने में ग्रामीण गैर कृषि आजीविका पहल को व्यवस्थित किया जायें।

7. प्रति स्पर्धा का महौल बनाने हेतु:-

आयोग ने किसानो में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की बात कही है इसके साथ अलग अलग फसलो को लेकर उनकी गुणवत्ता और वितरण पर विशेष नीति बनाने को कहा था। न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की बात की गयी थी।

8. रोजगार हेतुः-

खेती से जुड़े रोजगारो को बढ़ाने के लिए बाते कही गयी थी। इसके साथ ही किसानो के लिए श्नेट टेक होम इन कमश् को तय करने की बात रिपोर्ट में कही गयी थी।

वितरण प्रणाली में सुधार हेतु: इसे लेकर आयोग ने कई सिफारिसे की थी इसमें गाॅव के स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पूरी व्यवस्था का खाका खींचा गया था। इसमें किसानो को पैदावार को लेकर सुविधाओ को पहुचाने के साथ ही विदेशों में फसलो को भेजने की व्यवस्था थी। साथ ही फसलो के आयात और उनके भाव पर नजर रखने की व्यवस्था बनाने की सिफारस भी थी।

9. जैव संसाधनों हेतुः-

भारत में ग्रामीण लोग अपने पोषण एवं जीवनयापन के लिए जैव संसाधनो पर निर्भर है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाला बहादुर शास्त्री ने नारा किया था जय जवान जय किसान उनके बाद की सरकार इस नारे को लगता भूल ही गयी है। किसानों की आत्म हत्या और आज की खेती समस्या किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नही है। केन्द्र सरकार 2022 तक किसानो की आय दो गुना करने की बात करती है। लेकिन इसका गणित आज तक समझाया नही गया किस तरह किसानों के साथ यह कैया अन्याय है। किसानों को इसलिए दबाया जाता है कि किसान आन्दोलन ट्रेड यूनियन की तरह संगठित नही हैं।

वर्ष 2006 में राष्ट्रीय किसान आयोग की सिफारिसें भारत सरकार को सौपी दी गयी तथा वर्ष 2006 में ही षष्टम वेतन आयोग की सिफारिसे सौपी गयी थी जिन्हें लागू कर दी गयी इसके बाद सप्तम वेतन आयोग की सिफारिसे लागू कर दी गयी जिससे कर्मचारियों, अधिकारियों व हमारे जन प्रतिनिधियों आदि के वेतन, भत्ते और पेंशन कई गुना बढ़े लेकिन लगभग 11 वर्ष बाद भी राष्ट्रीय किसान आयोग की सिफारिसे लागू नही कि गयी है जिससे स्पष्ट होता है कि केन्द्र सरकार किसानों की समस्याओ के प्रति संवेदनशील नही हैं।

राष्ट्रीष किसान आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि समर्थन मूल्य खेती की लागत से कम होता है। इस कारण खेती घाटे का सौदा बन गयी है। और देश के 40 प्रतिशत किसान खेती छोड़ने पर बाध्य है। अता देश के किसानों के लिए डा0 स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें, एक उम्मीद की किरण हैं।

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